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आर्योंका भगवा ध्वज-Aryo ka Bhagva Dhvaj
₹ 50.00ध्वज यह किसी भी राष्ट्र, संस्था, समूह, विचार, योद्धाकी कीर्तिका और स्वभिमानका स्वरुप है। राष्ट्रकी कीर्ति, यश, धन, प्रतिष्ठा, सत्ता, सौंदर्य, बलकी विजय पताका हमेशा फहराती रहे यह प्रत्येक राष्ट्रकी, राष्ट्रके लोगोंकी हृदयंगम भावना और दृढ इच्छा होती है।
आर्य अर्थात् श्रेष्ठ और उनका सबकुछ श्रेष्ठ। आर्यावर्तकी इस भूमिमें अनेक राजा, चक्रवर्ती सम्राट आदि आए और उत्तम शासनसे प्रजाको सुखी करकें देवलोक प्राप्त किया। अनेक पाशवी और परदेशी सत्ताए इस देसमें शासन हेतु आई, तब इस देशकी अस्मिताका ध्वज हमेशा भगवा ही रहा है। हर तरहसे सामर्थ्यवान एसा यह आर्यावर्त बड़ी द्रढताके साथ मानता है की हमारे मूलमें वेदोंके विचार, ऋषि, वीर वीरांगनाए, संत और सतीयां है। यहाँ पद पद पर क्रान्ति और मानवताकी प्राप्तिके लिए बलिदान है इन सबके प्रतिक स्वरूप हमने भगवे ध्वजको आजकलसे ही नहीं अपितु आदिकालसे ही स्वीकारा है। वही हमारी शान है, मान है, स्वाभिमान है। इस ध्वजके तले ही अनेक लोगोंके बलिदान और हमारी भव्य विरासतकी रचना हुई है, जो हमारे जीवनमें और विकसित होनेमें मार्गदर्शक है। यह भगवा ध्वज ही हमारा प्राण है, हमारी चेतना है, हमारी कीर्ति है।
एसी अस्मिता जगानेवाली यह पुस्तक है की जिसका अध्ययन करनेसे आर्य व्यक्तिओमें भगवे ध्वज और उसके प्रति सभानता एवं गौरव बढेगा। इस भावसे स्वाध्याय मंडल किल्ला पारडी द्वारा इस पुस्तकका प्रकाशन हुआ है जिसका हमें गौरव है।
लेकिन भगवा ध्वज ही क्यों? क्या भगवा ध्वज पहलेसे है या कालक्रमसे धर्मआग्रहीयोंके आग्रहसे ध्वज भगवा हुआ है? क्या आज भी हमारा ध्वज भगवा है या सिर्फ हम हिन्दुओंका ध्वज भगवा है? क्या देवताओंका ध्वज भी भगवा है? भगवे ध्वजका वर्णन वेदोंमें है? भगवे ध्वजके लिए हमारी द्रढ़ता और समज बढ़ानेवाला, गौरव बढाये एसे हरएक प्रश्नोंके उतर पाठक इस ‘आर्योंका भगवा ध्वज’ पुस्तक द्वारा प्राप्त कर सकेंगे एसी हमारी दृढ धारणा है।निवेदन
स्वाध्याय मण्डल, किल्ला पारडी -
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सूर्य नमस्कार-Surya Namaskar
₹ 110.00हमने स्वयं सशास्त्र, समंत्र एवं खास पद्धतिसे प्रतिदिन सूर्यनमस्कारका नियमसे अभ्यास किया। हमने देखा कि इससे हमारी शारीरिक एवं मानसिक उन्नति बहुत हुई। ऐसी ही उन्नति सब स्त्री-पुरुषोंकी हो, इसी विचारसे हमने ‘सूर्य-नमस्कार’ नामकी छोटी पुस्तक मराठीमें लिखी। पंडित सातवलेकरजीने अपने ‘भारत-मुद्रणालय’ में छापकर उसे १९२२ ई. में प्रकाशित किया।
इस छोटी पुस्तकसे तथा हमारे अन्य लेखों एवं व्याख्यानोंके कारण सूर्यनमस्कारकी महत्ता महाराष्ट्रके बाहर उत्तरमें काश्मीर तक तथा दक्षिणमें लंका-सीलोन तक फैल गई। किंतु उत्तर भारत, दक्षिण भारत एवं लंकामें मराठी भाषाका प्रचार नहीं है। फलतः उन स्थानोंके अनेक आरोग्य-इच्छुक विद्वानोंने हमसे कहा तथा पत्रोंके द्वारा भी सूचित किया कि पुस्तक अंग्रेजी भाषामें लिखी जाये, जिससे संपूर्ण भारतवर्षमें, यही नहीं, भारतसे बाहर भी सूर्यनमस्कारकी आवश्यकता एवं महत्ता प्रतीत हो। हमें भी यह बात जँची और सन १९२८ ई. में ‘सूर्य-नमस्कार’ नामकी पुस्तक अंग्रेजीमें प्रसिद्ध हुई। इस पुस्तकमें नमस्कार कैसे करना चाहिये, उनसे शरीरके कौन कौन स्नायु और अन्तरिंद्रियाँ सुदृढ होती हैं, चित्तकी एकाग्रता कैसे बढती है, किसको कितना लाभ हुआ, नमस्कारोंसे सोलह आना लाभ होनेके लिये योग्य आहार कौनसा है, आहार कैसे तैयार करना चाहिए इत्यादि अनेक आनुषंगिक महत्त्वके विषयोंका विवेचन किया और विषयको स्पष्ट करनेके लिये ३०-३२ चित्र भी दिये। इसलिए यह अंग्रेजी पुस्तक मराठी पुस्तककी अपेक्षा बहुत बडी हो गई। वह हिंदुस्थानमें इतना पसंद आयी कि वह अबतक तीन बार छप चुकी और उसका भाषांतर हिंदी, कानडी, तेलगू, तामिल, गुजराती, बंगाली भाषाओंमें हुआ। इन भाषाओंमें भी यह पुस्तक अनेक बार छप चुकी। इसके सिवा मल्यालम और उर्दू भाषाओंमें भाषांतर हो रहा है।
इस पुस्तकमें हमारे अंग्रेजी पुस्तककी सब बातें संक्षेपमें दी हैं। नमस्कारके कुछ आसनोंमें, आसनोंके प्राणायाममें और अन्यान्य बातोंमें जो जो सुधार अबतक हुए, वे सब इस पुस्तकमें शामिल किए हैं। इस पुस्तकके साथ नमस्कारका बडा चित्रपट भी तैयार किया है। उसमें दसों आसनोंके बडे चित्र देकर प्रत्येक आसन शास्त्रोक्त प्राणायाम सहित कैसे किया जाय, इसकी सविस्तर सूचना भी दी गई है।
सूज्ञ पाठकोंसे हम यही आशा करते हैं कि वे सब आबालवृद्ध स्त्रीपुरुष शास्त्रशुद्ध एवं विशेष पद्धतिसे नमस्कार करके अपना शारीरिक और मानसिक-उभयविध कल्याण कर लें, तथा अपना अनुभव दूसरोंसे कहकर उन्हें भी नमस्कार करनेके लिए उत्साहित करें।भवानराव पंडित (औंध नरेश)
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ઓમ શાંતિ શાંતિ શાંતિ-Om Shanti Shanti Shanti
₹ 30.00Cum sociis natoque penatibus et magnis dis parturient montes, nascetur ridiculus mus. Maecenas vitae viverra risus. Vivamus eget accumsan elit, tincidunt pharetra orci. Maecenas neque mi, porttitor eu ullamcorper nec, aliquet eu nulla. Mauris maximus turpis tellus, vel aliquam neque aliquet accumsan. Maecenas ultrices facilisis libero, eu laoreet mauris. Integer non aliquam sapien, ut auctor sem. Vivamus urna urna, eleifend eget augue sed, pulvinar rutrum enim. Nullam lacinia mauris vel mattis lacinia.
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ગીતાનું રાજકીય તત્વજ્ઞાન-Gitanu Rajkiy Tatvagyan
₹ 150.00Cum sociis natoque penatibus et magnis dis parturient montes, nascetur ridiculus mus. Maecenas vitae viverra risus. Vivamus eget accumsan elit, tincidunt pharetra orci. Maecenas neque mi, porttitor eu ullamcorper nec, aliquet eu nulla. Mauris maximus turpis tellus, vel aliquam neque aliquet accumsan. Maecenas ultrices facilisis libero, eu laoreet mauris. Integer non aliquam sapien, ut auctor sem. Vivamus urna urna, eleifend eget augue sed, pulvinar rutrum enim. Nullam lacinia mauris vel mattis lacinia.
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