सूर्यभेदन व्यायाम
यह योगियोंकी बलवर्धक व्यायाम पद्धति है। अब तक इसकी मराठी, हिंदी और गुजराती भाषाओंमें 30 हजारसे ज्यादा प्रतियां बिक चुकी हैं। पुस्तकको अब आवश्यक सुधारोंके साथ पुनः प्रकाशित किया गया है। मुझे आशा है कि इस पुस्तकके माध्यमसे हरेक भारतीयको लाभ होगा और उनमें एक नई चेतना जागृत होगी।
संक्षेप में यह अभ्यास सामुदायिक आधार पर पाठशाला और महाविद्यालयों (स्कूलों और कॉलेजों) में शुरू किया जाना चाहिए। इसके आचरणसे लाभ ही लाभ होगा। किसी हानिकी कोई संभावना नहीं है। स्कूलोंके संचालक इस पर विचार कर विद्यार्थियोंको लाभ पहुंचानेका प्रयास करेंगे।
स्वराज्यमें सशक्त युवाओंका निर्माण होना चाहिए। इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होगा।
निवेदन –
पं. श्रीपाद श्रीदामोदर सातवळेकर
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