| Weight | 600 g |
|---|---|
| Author : | Shripad Damodar Satwalekar |
| Pages : | 289 |
| Edition : | First |
| Publishing Year : | 2025 |
| Language : | Hindi |
| Binding : | Soft Binding |
| Publisher : | Swadhyay Mandal |
| ISBN | 978-93-49020-15-3 |
संस्कृत स्वयं शिक्षक-Sanskrit Svayam Shikshak
परिचय
संस्कृत भाषा सबसे प्राचीन, सर्वोत्तम और प्रत्येक आर्यकी प्रमुख भाषा है। आर्योंके सभी धार्मिक ग्रंथ संस्कृतमें हैं। हमारी संस्कृतिकी गौरवशाली विरासत संस्कृतमें ही संरक्षित है। इसलिए प्रत्येक आर्य भाई-बहनको संस्कृत भाषाका अध्ययन अवश्य करना चाहिए।
इस ग्रंथका नाम ‘संस्कृत स्वयं शिक्षक’ है। इस नामको पढ़नेसे जो अर्थ समझमें आता है, वही इसका कार्य है। बिना किसी विद्वान या पण्डितकी सहायतासे इस ग्रंथका अध्ययन करके संस्कृत भाषाका ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। पाठक अपने काम-काजके दौरान, खाली समयमें बिना किसीकी सहायताके संस्कृतका अध्ययन कर सकते हैं। इस पुस्तकमें पढ़नेकी पद्धति इतनी सरल और सहज रखी गई है कि यदि कोई पाठक प्रतिदिन आधा घंटा या एक घंटा अध्ययन करे तो वह एक वर्षके भीतर रामायण और महाभारत आदि ग्रंथोको समझनेकी क्षमता प्राप्त कर सकता है। संस्कृत एक कठिन भाषा है, मृत भाषा है, सीखनेकी द्रष्टिसे एक अत्यंत कठिन भाषा है… ऐसी बातें कही जाती हैं, ऐसे समयमें यह ग्रंथ ‘संस्कृत स्वयं शिक्षक’ संस्कृतके क्षेत्रमें एक नई आशाका संचार करता है। भाषा शिक्षाके क्षेत्रमें यह ग्रंथ वैज्ञानिक तथा अत्यधिक उत्कृष्ट है।
प्रत्येक मनुष्य संस्कृत भाषाको आसानीसे समझ सके इसीलिये ‘संस्कृत स्वयं शिक्षक’ इस ग्रंथकी रचना ब्रह्मर्षि पंडित श्रीपाद दामोदर सातवळेकरजी द्वारा हुई है। बच्चों, विद्यार्थियों, युवा-युवतीओं, शिक्षकों, बुजुर्गों सहित सभी संस्कृत प्रेमियोंके लिए स्वाध्याय मंडल, किल्ला पारडी द्वारा यह ग्रंथ नए रूपमें पुनर्मुद्रित व प्रकाशित किया जा रहा है। हमारा दृढ़ विश्वास है कि देववाणी संस्कृतका अध्ययन करके प्रत्येक पाठक रामायण, महाभारत, वेद और उपनिषद जैसे धर्मग्रंथोंका अध्ययन करनेकी क्षमता प्राप्त करेगा।
निवेदन
स्वाध्याय मण्डल, किल्ला पारडी
₹ 390.00
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