विशेष पुस्तकें (Featured Books)
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काठक-संहिता - Kathak-Samhita
Author: Pandit Shripad Damodar Satwalekar
यजुर्वेद संहिता - Yajurved Samhita
Author: Pandit Shripad Damodar Satwalekar
अथर्ववेद संहिता - Atharvaved Samhita
Author: Pandit Shripad Damodar Satwalekar
श्रीमद्भगवद्गीता - पुरुषार्थ बोधिनी टीका - ShrimadBhagvadGita - Purusharth Bodhini Tika
Author: Pandit Shripad Damodar Satwalekar
श्रीमद्भगवद्गीता - पुरुषार्थ बोधिनी टीका - ShrimadbhagvadGita - Purusharth Bodhini Tika
Author: Pandit Shripad Damodar Satwalekar
वैदिक व्याख्यानमाला - Vedic Vyakhyanmala
Author: Pandit Shripad Damodar Satwalekar
कृष्ण यजुर्वेदीय तैतिरीय संहिता - Krishna Yajurvediya Taitiriya Samhita
Author: Pandit Shripad Damodar Satwalekar
सामवेद संहिता - Samved Samhita
Author: Pandit Shripad Damodar Satwalekar
श्रीपाद श्रीदामोदर सातवळेकर
स्वाध्याय मण्डल, किल्ला पारडी — संस्थापक
अनेक महान कर्मयोगीओंने भारत भूमिमें जन्म लिया है। वैसे ही एक महान कर्मयोगी श्रीपाद सातवलेकर जिन्होंने आजीवन वेदनारायणकी सेवा करते हुए पुरे विश्वमें वैदिक ध्वज लहरानेका, मानव जीवनको सच्चा मार्ग दिखानेका, विश्व-शान्तिका जयघोष करनेका, व्यक्तिसे लेकर राष्ट्र तक सभीको सबल बनानेका प्रचंड कर्मयोग किया है।
वैदिक वाङ्मयको अन्तिम मनुष्य तक ले जानेके लिए उन्होंने वेदोको विषयवार विभाजित करके, वेदोमेंसे सबको सरल लगे ऐसे विषयों और अर्थोंको विभाजित करके सही अर्थमें वैचारिक क्रांतिका सर्जन किया है।
राष्ट्र, स्वराज्य, राज्यशासन, अर्थव्यवस्था, कृषि, गौपालन, शिक्षक, स्त्री कर्तव्य-कार्य, प्रकृति, दंडके विधान, युद्ध कला, उपासना प्रणालियाँ, देवताओंके स्वरूप, ब्रह्मांड रहस्य, गर्भविज्ञान, वैदिक विज्ञान, आयुर्वेद, योग, ब्रह्मविद्या, संस्कृत, वेदाध्ययन, ब्रह्मचर्य एवं अनेक विविध विद्याएं।
व्यक्ति अपने आप ही संस्कृत भाषा और वेदोंका अध्ययन कर सके इस हेतु 'संस्कृत स्वयं शिक्षक' और 'वेद स्वयं शिक्षक' जैसी रचनाएं करके महान विचार क्रान्ति की है।
आप सभी पाठक और सभी मनुष्य ईश्वरकृत अपौरुषेय ऐसे वेद और वैदिक वाङ्मयका परिचयात्मक और गहन अभ्यास करें, कराएं इसलिए अपने आसपास 'स्वाध्याय मण्डल' निर्माण करके वेदोंका स्वाध्याय करें और हम सब साथ मिलकर निम्नलिखित वैदिक घोषणाको सार्थक करें।
सर्वेत्र सुखिन: सन्तु सर्वे सन्तु निरामया:।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखमाप्नुयात्॥
समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः।
समानमस्तु वो मनः यथा वः सुसहासति॥
ॐ सहनाववतु सहनौ भुनक्तु। सहवीर्यं करवावहै।
तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै॥
ॐ शांतिः शांतिः शांतिः॥